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अंतिम यात्रा में मुर्दे को भी सुकून नहीं! श्मशान तक कीचड़ व गहरे नाले से गुजरती है अंतिम यात्रा, गांव में मूलभूत सुविधाओं का भी अभवा पढे खबर

News Published By Mr.Dinesh Nalwaya
Publish Date: 22-07-2025

रत्नमोती न्यूज डेक्स

नीमच। आजादी के 75 साल बाद भी नीमच जिले के बीरमपुरा गांव में श्मशान तक पहुंचने का पक्का रास्ता नहीं है। बारिश में हालात और बिगड़ जाते हैं। गांव के लोग ऊपर वाले से यही दुआ करते हैं कि इस मौसम में किसी की मौत न हो। रविवार को गांव के 60 साल के बुजुर्ग रंजीत बंजारा का निधन हुआ। दोपहर करीब 12 बजे उनकी मौत के बाद शवयात्रा निकालनी मुश्किल हो गई। श्मशान तक जाने के लिए कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। रास्ते में बरसाती नाला भी था, जिसमें पानी बह रहा था। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अर्थी को नाले के पार पहुंचाया। इस दौरान कई बार लोग फिसले। शवयात्रा में शामिल लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। हालात यह थे कि शवयात्रा में लोग 4 से 5 फिट गहरे पानी से लेकर गुजरे। बीरमपुरा गांव बधावा पंचायत में आता है। यह जावद क्षेत्र की सबसे बड़ी पंचायत है। गांव की आबादी करीब 150 है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ रास्ता ही नहीं, गांव में अन्य मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। कई काम वे आपसी सहयोग से कर लेते हैं, लेकिन हर काम संभव नहीं होता। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है। कई बार विधायक, जनपद पंचायत अध्यक्ष, सरपंच, जिला पंचायत सीईओ और अन्य अधिकारियों को पुलिया निर्माण की मांग की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। किसी ने समस्या का हल नहीं किया। ग्राम पंचायत बधावा के सचिव उमेश व्यास ने कहा कि ग्रामीणों से जानकारी मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही गांव में शासकीय जमीन पर मुक्तिधाम की व्यवस्था की जाएगी।
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